क्यों होता है ऐसा?
भारत में एक लड़की होने के कोई मायने नहीं हैं. लड़की सिर्फ और सिर्फ खर्चे कि वजह है, और इसीलिए उसकी जरूरत किसी को नहीं है. उसे किसी लड़के की तरह स्कूल जाने कि जरूरत नहीं है, न् ही कुछ सीखने की. उसे सिर्फ पुरुष की गुलामी भर करनी है.
लेकिन लड़कियों के जन्म के पीछे ईश्वर का उद्देश्य यह तो नहीं है? जो भी जन्म लेता है, उसे अपने जीवन के पथ पर चलने का हक तो होना ही चाहिए. एक लड़की के रूप में जन लेने का अर्थ आजीवन मूढ़ बनकर रहना तो नहीं हो सकता. पुरुष का जन्म भी नारी से ही संभव है.
क्या नारीहीन भारत की कल्पना संभव है? बात चाहे महात्मा गाँधी की जाये, मदर टेरेसा या इंदिरा गाँधी की, सभी का जन्म नारी से ही होता है. कल्पना कीजिये भविष्य की मदर टेरेसा या इंदिरा गाँधी की जन्म से पूर्व या पश्चात हत्या की...
विषय अवधारणा:
हम ऐसे तमाम कार्यक्रम बनायेंगे जिनके तहत उन तमाम सम्बंधित क्षेत्रों और गावों का दौरा किया जायेगा और चित्रों, विडियो, फिल्मों और ऐसे तमाम माध्यमों से लोगों को यह बताया, समझाया जायेगा कि गर्भ में पलते बच्चे गैरकानूनी होने के अलावा अनैतिक है. साथ ही एक शिशु केंद्र खोले जाने का प्रावधान है , जहाँ किसी शिशु को छोड़कर शिशु केंद्र के सञ्चालन को एक संकेत दे दिया जाये, जिसके बाद उसकी देखरेख शिशु केंद्र ले ले. ऐसे में माता पिता को अज्ञात बने रहने की सुविधा होगी और शिशु को बाद में गोद लिया जा सकेगा.
संभव है कि इसके बाद भी कुछ लोग शिशुओं को सड़क किनारे मरने के लिए छोड़ जाएँ,ऐसे हालत के लिए आपात स्वस्थ्य सेवाओं का प्रावधान है , जो स्थानीय पुलिस को सूचना देने का भी काम करेंगे. जो बच्चे गोद नहीं लिए जा सकेंगे, उनके लिए भी यह प्रावधान है कि वे अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और अपना व्यवसाय चुन सकें.
इस प्रकार के शिशु केन्द्रों के बारें में अधिक जानकारी के निम्नलिखित लिंक से पाई जा सकती है:
http://de.wikipedia.org/wiki/Babyklappe
http://www.babyklappe.info/babyklappen-hotline/ind
http://www.tdh.de/content/themen/weitere/babyklapp
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